VIDEO: गढ़वाल भ्रातृ मंडल के महासचिव रमनमोहन कुकरेती 47 सालों से कर रहे हैं उत्तराखंड के लिए काम

December 8, 2018 | samvaad365

मुंबई महाराष्ट्र में उत्तराखंड के लोगों के लिए काम करने वाले और गढ़वाल भ्रातृ मंडल के महासचिव के रुप में कार्यरत रमनमोहन कुकरेती पिछले 47 सालों से इस संस्था के साथ जुड़ें हुए हैं। यह एक ऐसी संस्था है जो पिछले 90 सालों से उत्तराखंड के लोगों के लिए कार्यरत्त है। यह संस्था सन् 1918 से उत्तराखंड के लोगों की मदद करने का कार्य करती आ रही है। रमनमोहन कुकरेती इस संस्था के साथ जुड़कर जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं। रमनमोहन इस संस्था के साथ साल 1975 में जुड़े थे। वह सन् 1982 से 1992 तक इस संस्था के लिए सेक्रेट्री पद पर कार्यरत थे। इसके बाद कुछ नीजि कारणों के चलते वह इस संस्था से अलग हो गए लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पुनः इस संस्था को जॉइन किया। इसके बाद लोगों ने उन्हें संस्था के महासचिव के रुप में चुना।

सन् 1918 में जब विश्वयुद्ध हुआ था तब उत्तराखंड के लोग और उत्तराखंड राज्य पाहड़ी के नाम से जाने जाते थे, उस समय उत्तराखंड के कुछ लोग महाराष्ट्र में जाकर एकसाथ रहने लगे थे, यह 8-10 उत्तराखंडी लोगों का समूह था। ये लोग अक्सर बैठक किया करते थे, जिस दौरान इन लोगों ने ये जरूरत महसूस की कि उनकी अपने लोगों का भी एक संगठन या संस्था होनी चाहिए। जिसके बाद इस संस्था का गठन किया गया।

इस संस्था का नाम गढ़वाल भ्रातृ मंडल मुंबई रखा गया। 1928 में इस संस्था का गठन कर इसका संचालन शुरू किया गया। यह संस्था जिन लोगों ने बनाई है वह उनके लिए काफी भावनात्मक हैं। इस संस्था में हर जगह के लोग जुड़े हुए हैं। जौनसार से लेकर कुमाउं, पौड़ी टिहरी चमोली यह संस्था उत्तराखंड में मौजूद हर जिले के लिए कार्य करती है। ये संस्था मुख्य रुप से अपनी पहचान कायम करने का कार्य करती है इसी वजह से संस्था का पहला उत्तरदायित्व होता है कि वह बाहरी लोगों के बीच जाकर अपनी पहचान को स्थापित कर सके। इस संस्था ने सबसे पहले रामलीला करना शुरू किया जिसे लोगों ने पहाड़ी रामलीला का नाम दिया। लोग खुशी-खुशी इस रामलीला को देखने आते थे। दरअसल उस समय यानि की साल 2001 से पहले राज्य को उत्तराखंड का नाम नहीं दिया गया था जिसके चलते संस्था द्वारा दिखाई जाने वाली रामलीला को पहाड़ी रामलीला का नाम दिया गया।

यह संस्था उनके लिए भी काम करती है जो लोग इस संस्था से जुड़े हुए हैं। बच्चों की शिक्षा से लेकर उन्हें फीस मुहैया कराने तक का कार्य करना, साथ ही गरीब बच्चों को किताबे-लेखन सामग्री मुफ्त में उपलब्ध कराना। रमनमोहन कुकरेती पिछले 47 सालों से इस संस्था के साथ जुड़कर जरुरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं। साल 1975 में वह इस संस्था के साथ जुड़े थे। 1982 से 1992 तक वह इस संस्था के लिए सेक्रेट्री पद पर कार्यरत थें। इसके बाद कुछ नीजि कारणों के चलते वह इस संस्था से अलग हो गए लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पुनः इस संस्था को जॉइन किया। इसके बाद लोगों ने उन्हें संस्था के महासचिव के रुप में चुना। इस संस्था का उत्तराखंड सरकार के साथ समन्वय है जिस कारण संस्था के द्वारा सरकार तक लोगों की समस्याएं पहुंचाई जाती हैं। समस्याओं से जुड़े समाधानों के लिए ये संस्था सरकार से मदद मांगने के साथ-साथ कई तरह के सेमिनार और कार्यक्रमों का आयोजन भी करती है।

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देहरादून/काजल

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