6 साल में सबसे निचले स्तर पर GDP… कृषि और विनिर्माण क्षेत्र का कमजोर प्रदर्शन

November 30, 2019 | samvaad365

नेशनल स्टैटिक्स ऑफिस (NSO) ने चालू वित्त वर्ष (2019-20) की दूसरी तिमाही (जुलाई- सितंबर) के आंकड़े जारी किए है. इस तिमाही में देश की विकास दर GDP हिंदी में (सकल घरेलू उत्पाद) दर 4.5 फीसदी रही है. यह विकास दर पिछले 6 सालों में सबसे न्यूनतम स्तर पर है. दूसरी तिमाही के आंकड़े अब देश की अर्थव्यवस्था के संकटग्रस्त होने की ओर इशारा भी कर रहे हैं. ठीक एक साल पहले यानी कि वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में GDP 7 फीसदी के करीब थी. तब और उससे पहले यह गूंज सुनाई दे रही थी कि देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है. लेकिन तेजी से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था अब पांच फीसदी के नीचे ही है.

पिछली तिमाही में यह दर 5 फीसदी के करीब थी. उस वक्त भी जानकारों ने यह संकेत दिए थे कि अर्थव्यवस्था बुरे दौर में जा सकती है. यह विकास दर आधार वर्ष (2011-12) के अनुसार है, गौरतलब है कि नाॅमिनल वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत पर रही है जो कि पिछले एक दशक में सबसे कम है. GDP को दो प्रकार से समझा जा सकता है. नाॅमिनल GDP और वास्तविक GDP लेकिन इससे पहले आपको आधार वर्ष समझना चाहिए. जिसके आधार पर जीडीपी का आंकलन किया जाता है.

क्या होता है आधार वर्ष

जैसा कि हम नाम से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि आधार वर्ष एक प्रकार का बेंचमार्क होता है. जिसे हम बेस मान सकते हैं. इसमें कीमतें स्थिर मानी जाती हैं जबकि चालू वर्ष में यह कीमतें बदल सकती हैं. और इसी के संदर्भ में सकल घरेलू उत्पाद यानी कि GDP की गणना की जाती है.

आधार वर्ष को चुनते समय यह भी ध्यान रखा जाता है कि उस वर्ष में कोई बड़ी आर्थिक या प्राकृतिक घटना न घटी हो साथ ही वह चालू वर्ष के करीब भी हो ताकि अर्थव्यवस्था की गणना सही की जा सके. आधार वर्ष को 7 से 10 साल में बदला जाता है. पहली बार सन 1956 में आधार वर्ष का प्रयोग किया गया था.   इस वक्त आधार वर्ष (2011-12) को माना गया है.

जीडीपी क्या है ? और कितने प्रकार की हैं ?

सकल घरेलू उत्पाद यानी कि GDP किसी देश या अर्थव्यवस्था के विकास का माप समझा जा सकता है. इससे हम यह समझ सकते हैं कि अर्थव्यवस्था कितनी बढ़ी लोगों का जीवन स्तर कितना सुधरा, रोजगार की क्या स्थिति रही. साधारण भाषा में जीडीपी का संबंध किसी देश में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य से होता है. यह दो प्रकार की होती है.

नॉमिनल जीडीपी – इसमें चालू वित्त वर्ष का बड़ा रोल समझा जा सकता है. चालू कीमतों यानी कि वर्तमान वर्ष की प्रचलित कीमत में व्यक्त सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को इसमें मापा जाता है. यह इस तिमाही में 6.1 प्रतिशत रही. जो कि पिछले एक दशक में सबसे कम है.

वास्तविक जीडीपीः नाम से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं यह वास्तविक जीडीपी होती है लेकिन इसका माप आधार वर्ष से किया जाता है. यानी कि यह किसी आधार वर्ष की कीमतों पर व्यक्त की गई सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को बताता है. वर्तमान तिमाही में यह 4.5 प्रतिशत है जो कि पिछले 6 सालों मे सबसे कम है और आधार वर्ष 2011-12 है.

कमजोर जीडीपी में क्याक्या हुआ ?

अब समझने वाली बात यह है कि आखिर जो जीडीपी एक साल पहले 7 प्रतिशत के स्तर पर थी वह घटने क्यों लगी. इस तिमाही में जारी आंकड़ों के मुताबिक विनिर्माण यानी कि (मैन्युफैक्चर सेक्टर) काफी सुस्त रहा है. साथ ही कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन भी खराब रहा और इन दोनों का ही असर जीडीपी पर रहा है. गौरतलब है कि विनिर्माण क्षेत्र में पिछली तिमाही में भी कमी देखने को मिली थी. अकेले विनिर्माण क्षेत्र में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं कृषि वानिकी में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

निवेश के भी नहीं आ रहे अच्छे दिन

कृषि और विनिर्माण के अलावा निवेश में भी वृद्धि उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रही है. निवेश वृद्धि दर मात्र एक प्रतिशत ही रही है. जो कि दिसंबर 2014 की तिमाही के बाद सबसे धीमी रफ्तार है. सरकार ने पहली तिमाही के बाद निवेश में वृद्धि को लेकर काफी कोशिशें भी हैं. कॉर्पोरेट कर में कटौती के बाद निवेश की उम्मीद सरकार को जरूर है लेकिन निवेश दर 27.6 प्रतिशत है जो कि 11 तिमाहियों में सबसे कम है.

क्या बोले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री डॉ मनमोहन सिंह ने दूसरी तिमाही के इन नतीजों पर चिंता जताई है. मनमोहन सिंह ने 4.5 की वृद्धि दर को नाकाफी, अनअपेक्षित और चिंताजनक बताया है.

यह भी पढ़ें- सरकार का बड़ा कदम ‘रणनीतिक विनिवेश’ और ‘अर्थव्यवस्था’

 

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