Water crisis: दिल्ली से बेंगलुरु तक क्यों सूख रहा महानगरों का गला

June 14, 2024 | samvaad365

देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों जल संकट से जूझ रही है। संकट इतना विकराल हो गया कि देश की सर्वोच्च अदालत को सुनवाई करनी पड़ रही है। हरियाणा से आने वाली मूनक नहर पर पुलिस का पहरा है ताकि पानी की सेंधमारी न की जा सके। नदियों-पहाड़ों और प्राकृतिक संपदा से संपन्न हिमाचल प्रदेश ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।

हिमाचल सरकार का कहना है कि उसके पास सिर्फ अपनी जरूरत भर का पानी है। दिल्ली को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है। देश में सिर्फ दिल्ली ही नहीं, कई और शहरों व राज्यों का भी गला सूख रहा है।महानगरों में पानी का टैंकर आते ही लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं। जमकर धक्का-मुक्की और सिर फुटव्वल भी होती है। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं सिर और कमर पर पानी का कलसा उठाए आती-जाती नजर आएंगी।

रेन मैन’ के नाम से मशहूर डॉ. शेखर राघवन का कहना है कि कभी दिल्‍ली, बेंगलुरु और चेन्‍नई जैसे महानगरों में कुओं में पानी हुआ करता था। अब कुएं सूखे पड़े हैं और पीने का पानी बोतलों में बिक रहा है। पानी की किल्लत कोई एक दिन में शुरू नहीं हुई है ना।

 

उनका कहना है कि धीरे-धीरे पहले ग्राउंड वाटर लेवल डाउन हुआ। कुआं, जलाशय और फिर बोरवेल सूखने लगे। नल और हैंडपंप में पानी आना बंद होता गया, लेकिन हमने ग्राउंड वाटर लेवल को चार्ज करने के लिए प्रयास के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की है, जिसका परिणाम है यह जल संकट।

भविष्‍य में हो सकता है वाटर वार

डीसीएम श्रीराम और सत्व नॉलेज की मार्च, 2024 में आई रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में जल संकट का गंभीर खतरा है। 2050 तक देश में 50 प्रतिशत से ज्यादा जिलों में पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा। लोग बूंद-बूंद पानी का तरसने लगेंगे। उस वक्‍त तक देश में प्रति व्यक्ति पानी की मांग में 30% का इजाफा होने की संभावना है।

वहीं बढ़ती आबादी और जल संसाधनों की कमी के कारण प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में 15% तक कमी दर्ज की जा सकती है। यानी कि पानी की बढ़ती मांग और सप्लाई में कमी के कारण संतुलन बिगड़ने की आशंका है।

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