बाराबंकी: पकौड़े तलने को मजबूर राष्ट्रीय खिलाड़ी, कोरोना के चलते छिन गया रोजगार

September 4, 2020 | samvaad365

बाराबंकी: परचून की दुकान चला रहे और चाय समोसा बना रहे ये हैं बाराबंकी के शाहवपुर कस्बे के रहने वाले महेंद्र प्रताप सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज रहे हैं, लेकिन आज ये प्रतिभावन खिलाड़ी अपनी रोजी रोटी के लिए समोसे तल रहा है। कोरोना वायरस ने बाकी दुनिया की ही तरह महेंद्र प्रताप पर भी असर डाला है। कई प्रतियोगिताओं में कई मेडल अपने नाम करने वाले इस खिलाड़ी के सामने आज रोजी रोटी का संकट है। महेन्द्र ने अपने घर पर एक छोटी सी परचून की दुकान और चाय पकौड़े की दुकान खोली है। तीरंदाज महेंद्र ने अपने जीवन के 25 साल खेल को दे दिए, देश भर में आयोजित होने वाली खेल प्रतियोगिताओं में दर्जनों मेडल जीते और बाराबंकी के केडी सिंह बाबु स्टेडियम में बतौर 18 साल से संविदा पर कोच की नौकरी कर रहे थे, लेकिन कोरोनाकाल की मार ऐसी पड़ी की खेल निदेशालय ने नौकरी छीन ली और खिलाड़ी बेरोजगार हो गया ।

महेन्द्र बताते है कि कोच के रूप में उन्होंने प्रदेश के कई जनपदों में अपनी सेवाएं दी है और उनसे प्रशिक्षण पाकर दो दर्जन से ज्यादा खिलाड़ियों ने देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है. तीरंदाज महेन्द्र के पिता भी एक राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज थे जिनके पदचिन्हों पर चलकर महेन्द्र भी एक राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज बने, लेकिन अब महेन्द्र अपने बेटे को खिलाड़ी नही बनाना चाहते है। एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी की स्थिति को देखकर आज सवाल सरकर की मंशा पर भी उठते हैं। आखिर क्यों ऐसे लोगों को आर्थिक रूप से सुरक्षा नहीं दी जाती। अगर महेंद्र के पास कोई रोजगार होता तो अन्य युवाओं को भी प्रतिभावान बना पाते।

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संवाद365/अंकित यादव

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