पौड़ी के अनुज बिष्ट: सॉफ्टवेयर इंजीनियर से बन गए मुर्गी पालक, आज कमा रहे हैं 60 हजार महीना

June 3, 2020 | samvaad365

पौड़ी गढ़वाल की कफोलस्यूं पट्टी में पौड़ी- कोटद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर डांग गांव स्थित है। इसी गांव के एक युवा अनुज बिष्ट ने स्वरोजगार की मिसाल कायम की है, कुक्कुट पालन से कैसे अपनी आजीविका चलाई जा सकती है यह बात साबित की है अनुज बिष्ट ने, अनुज के पिता फौज से रिटायर हैं, बड़ा भाई एयरफोर्स में है। अनुज खुद एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे लेकिन शहर की भागदौड़ में मन नहीं लगा तो अपने गांव चले आए, गांव आकर अनुज ने वहीं पर अपना रोजगार स्थापित करने की सोची। अनुज सोचते रहे कि क्या काम किया जाए तभी वो अपने गांव के चाचा और केंद्रीय मंत्री डॉ निशंक के निजी सचिव अजय बिष्ट के पास सलाह के जाते हैं काफी मंथन के बाद वो उन्हें सलाह देते हैं कि इस क्षेत्र में मुर्गी पालन का कार्य प्रोफेशनली किसी ने नहीं किया। फिर क्या था अनुज बिष्ट ने देहरादून में एटीएम की कंपनी फॉक्स को छोड़कर गांव का रूख किया।

अनुज ने गांव पहुंचकर कई माध्यमों से कर्ज लेकर और खुद से लाखों रूपए लगाकर पोल्ट्री फॉर्म खोल दिया। उन्होंने सफेद मुर्गों की जगह देशी मुर्गो का पालन करना उचित समझा अनुज इसे पीछे कई वजह बताते हैं। वो कहते हैं कि ये मुर्गे साधारण से चारे पर भी जीवित रह सकते हैं। और इन्हें रोग लगने के चांस भी ना के बराबर हैं। अनुज बताते हैं कि शुरूआती दौर में उन्होंने 2000 के करीब चुजे मंगाए आज उनके पास 1200 से 1300 मुर्गियां हैं उनकी डिमांड कोटद्वार, देहरादून पौड़ी जैसी जगहों पर काफी ज्यादा है, अनुज मुर्गी पालन से ही करीब 50 हजार से 60 हजार महीना कमा लेते हैं। उन्होंने ये भी बताया कि अब वो कड़कनाथ को पालने की सोच रहे हैं। आपको बता दें कि अनुज की शादी को अभी एक साल भी नहीं हुआ है उनकी पत्नी भी स्वेटर बनाने का कार्य करती हैं सीजन में वो भी 15 से 20 हजार रूपए महीना कमा लेती हैं। आज अनुज ने काम काज के लिए एक नेपाली परिवार को भी रखा है।

आज जब कोरोना संकट में कई लोगों के रोजगार खत्म हो गए कई लोग वापस अपने गांव की ओर लौटे हैं तो ऐसे में अनुज उनके लिए एक प्रेरणादायी भी बन सकते हैं। अनुज से सीख ले सकते हैं कि अपने गांव में अपने घर में रोजगार का सृजन कैसे किया जा सकता है।

(संवाद 365/मनोज इष्टवाल)

 

 

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