दून अस्पताल से गायब हुए संत गोपालदास, गंगा रक्षा को लेकर कर रहे थे अनशन

December 7, 2018 | samvaad365

गंगा रक्षा को लेकर अनशन कर रहे संत गोपाल दास दून अस्पताल में उपचार शुरू होने के करीब सात घंटे बाद अचानक गायब हो गए। वह इलाज कराने के लिए दिल्ली एम्स से दून अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल प्रशासन से सूचना मिलने के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची। देर रात तक पुलिस टीम उनकी तलाश करती रही। लेकिन, गोपाल दास का पता नहीं लगा।

लंबे अनशन के चलते स्वास्थ्य बिगड़ने पर संत गोपाल दास पूर्व में ऋषिकेश एम्स अल्पताल में भर्ती थे। वहां से उन्हें सोमवार को दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) रेफर कर दिया गया था। दिल्ली एम्स से डिस्चार्ज होकर संत बुधवार दोपहर सुबह दून अस्पताल पहुंचे। यहां उनके शिष्य ने तीमारदार के तौर पर संत को भर्ती कराया। अस्पताल में उनका उपचार शुरू किया गया। लेकिन, उन्होंने देर शाम तक न तो कोई जांच कराई और न ही कोई दवाई ली। अस्पताल में वह वार्ड 14 के बेड संख्या 15 पर भर्ती थे। रात पौने आठ बजे अस्पताल कर्मचारियों ने देखा तो संत और उनके तीमारदार दोनों गायब थे। काफी देर तलाश के बाद प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस को दी।

संत के गायब होने की सूचना मिलते ही पुलिस अफसर हरकत में आ गए। पुलिस ने अस्पताल के आसपास देर रात तलाश करने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले। लेकिन संत गोपाल दास का कुछ पता नहीं लगा, पुलिस अभी भी उनकी तलाश में लगी हुई है। वहीं जब उनके वार्ड में भर्ती मरीजों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शाम के 6 बजे तक वो अस्पताल में मौजूद थे और कुछ पुस्तकें पढ़ने में वयस्त थे फिर कुछ देर बाद वो वहीं वार्ड में टहलने लग गए जिसके थोड़ी देर बाद वो गायब हो गए। जिसके बाद पुलिस भी उनको ढूंढते हुए वहाँ आयी।

संत गोपाल दास की सुरक्षा में कानूनी तौर पर किसी पुलिस कर्मी की ड्यूटी नहीं लगाई गई थी। हालांकि, कोतवाली पुलिस को उनपर निगरानी का निर्देश दिया गया था। उनके लापता होने में किस स्तर से लापरवाही हुई है, इसकी जांच की जा रही है। हरिद्वार के मातृ सदन में अनशन के दौरान गोपालदास ने देह त्यागने के लिए संथारा साधना करने का ऐलान और अनिश्चितकालीन मौन साधना की घोषणा की थी। गोपालदास ने बीती 13 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संथारा साधना के दौरान शासन और प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की खलल न डालने की अपील की थी।

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देहरादून/अमित रतूड़ी

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