चमोली के किमाणा गांव का अनोखा भवन, मान्यताओं के अनुसार पांडवों ने बनाया भवन

August 7, 2020 | samvaad365

चमोली: देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली का एक छोटा सा गांव किमाणा जो कि जोशीमठ ब्लॉक के अंतर्गत आता. ये उत्तराखंड का एक ऐसा दुर्गम क्षेत्र है जो कि आज भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। लेकिन भले ही वर्तमान काल में विकास की दृष्टि से यह एक बेहद पिछड़ा क्षेत्र हो लेकिन ये गांव अपने मे एक धरोहर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किमाणा में पांडवों की अद्भुत निशानी आज भी मौजूद है। जिसका प्रमाण है गांव के बीचों बीच अनोखी स्थापत्य शैली में बना भवन। जौनसार के बाद समूचे गढ़वाल क्षेत्र में एकमात्र यही एक ऐसा स्थान है जहां पर इस शैली का भवन मौजूद है। जिसे यहां के लोग पांडवों की निशानी के तौर पर देखते हैं और पूजते हैं।

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धार्मिक मान्यता के अनुसार सतोपंथ स्वर्गारोहण से पूर्व पांडवों ने इस स्थान पर प्रवास किया था। यह स्थान जोशीमठ से 30 किलोमीटर दूर है। किमाणा गांव में पांडवों का पाण्डु धारा के अलावा पाण्डु खेत भी मौजूद है। कहा जाता है कि क्षेत्र में एकमात्र जो अद्भुत शैली का भवन है उसका निर्माण भी स्वयं  पांडवों ने ही किया था। खास बात यह है कि इस भवन का सत्तर फीसदी भाग  देवदार की लकड़ी से बनाया गया है। और बाकी तीस फीसदी पत्थर का प्रयोग हुआ है। भवन पर लगी देवदार की लकड़ियों पर जबरदस्त नक्काशी की गई है जो इसे और भी ज्यादा भव्य बना देती है।

ग्रामीणों के मुताबिक भवन के अंदर आज भी कई अस्त्र शस्त्र मौजूद हैं। जिन्हें बदरी क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही पांडवों ने यहाँ पर छोड़ था । जिनकी प्राचीन काल से अब तक निरंतर यहां पर नियमित रूप से पूजा की जाती है। स्थानीय लोगों की उत्तराखंड सरकार से मांग है कि ऐसे ऐतिहासिक स्थानों को राज्य पर्यटन मानचित्र में स्थान मिले ताकि क्षेत्र में देशी विदेशी पर्यटकों व शोधार्थियों का आवागमन बढ़ सके । जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने लगेगा।

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संवाद365/शशि भूषण मैठाणी

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