टिहरी: जड़धार गांव पहुंचा अमेरिकी छात्रों का ग्रुप… सीख रहे हैं पहाड़ों की खेती

March 14, 2020 | samvaad365

टिहरी: जहां एक तरफ पहाड़ों से लोग खेती छोड़कर पलायन करने को मजबूर है, वहीं पहाड़ी खेती को जानने और उसके गुर समझने के लिए विदेशी लोग पहा़ड़ में पहुंच रहे हैं, उसकी बारिकियां समझ रहे हैं. अमेरिकी स्टूडेंट्स का एक समूह इन दिनों जड़धार गांव में जैविक खेती के साथ ही संरक्षित जंगल और पहाड़ी उत्पादों की जानकारी ले रहा है.

चिपको आंदोलन की पृष्ठभूमि टिहरी जिले की हेवलघाटी अपनी जैविक खेती और संरक्षित जंगल के लिए मशहूर है. बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी के प्रयासों से जड़धार गांव के ग्रामीणों ने समूह बनाकर न सिर्फ अपने यहां जंगल को बचाया बल्कि जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया. इन दिनों विजय जड़धारी से जैविक खेती के गुर सीखने और बीज को बचाने की जानकारी लेने के लिए अमेरिका की अलग अलग यूनिवर्सिटी के 10 छात्र छात्राएं यहां पहुंचे है, और पहाड़ों में खेती किस तरह से की जाती है जंगलों को किस तरह बचाया जाता है. साथ ही पहाड़ी लोगों की दिनचर्या और पहाड़ी खाद्य पदार्थों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं.

4 माह के ट्रेनिंग के लिए इंडिया पहुंचे इन अमेरिकी स्टूडेंट्स को इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रेनिंग जयपुर के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्रों में जाकर जैविक खेती की जानकारी दी जा रही है. विजय जड़धारी का भी मानना है कि पहाड़ में की जाने वाले खेती बिल्कुल अलग तरह की है और इसी वजह से पहाड़ में होने वाले कोदा, झंगोरा, राजमा और अन्य तरह के खाद्य पदार्थों का अपना अलग महत्व है जिसको लेकर अब दुनिया भर के लोग जागरूक हो रहे हैं.

पहाड़ों में खेती और पहाड़ी खाद्य पदार्थों के प्रति अब विदेशी भी अपनी रूचि दिखाने लगे है ऐसे में सरकार को जरूरत है तो इस ओर ध्यान देने की जिससे इसे बढ़ावा दिया जा सके और पहाड़ों से पलायन को रोका जा सके.

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संवाद365/बलवंत रावत

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