विकास दुबे के केस में सामने आया बिहार का कनेक्शन, आइए बताते है आपको उस कनेक्शन के बारे में

July 17, 2020 | samvaad365

बिहार: कानपुर में दो जुलाई को विकास दुबे के कुछ लोगों ने लाइसेंसी के साथ ही अवैध हथियारों से पुलिस पर लगातार फायरिंग की थी। एसटीएफ और पुलिस की जांच पड़ताल में इसका खुलासा हुआ है। यह ख़बर भी सामने आ रही है कि विकास दुबे का अवैध तमंचों की सप्लाई का भी एक बड़ा नेटवर्क था। उसके सप्लायरों के बारे में जानकारी मिली है। वे फिलहाल अंडरग्राउंड हैं और पुलिस तलाश में जुटी है। कुछ अपग्रेडेड कंट्री मेड पिस्टल की सप्लाई बिहार से हुआ करती थी।

अब तक गिरफ्तार किए गए विकास दुबे के लोगों ने पुलिस को बताया है कि घटना की रात विकास के बुलावे पर लाइसेंसी असलहा तो लाए ही थे, फायरिंग में एक दर्जन से ज्यादा अवैध तमंचों का भी इस्तेमाल हुआ था। पहले राउंड में तमंचों से ही फायरिंग की गई थी। उसके बाद लाइसेंसी असलहों का प्रयोग किया गया। यह भी बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में अवैध तमंचों की सप्लाई शुक्लागंज, उन्नाव और बिल्हौर के अलावा एमपी से होती थी। कुछ अपग्रेडेड कंट्री मेड (देसी) पिस्टल की सप्लाई बिहार से ही होती थी। विकास दुबे के गुर्ग खुद ही कर लेते थे टेस्ट,उन्नाव, शुक्लागंज और बिल्हौर के चार सप्लायर विशेष तौर पर विकास के लिए तमंचे तैयार कराते थे। वह इनके बड़े ग्राहकों में शामिल था। विकास के गुर्गे खुद इतने शातिर और चालक थे कि असलहा देखकर उसकी पहचान बता देते थे। वह ऐसे तमंचे चुनते थे, जिससे फायरिंग मिस न हो । यइसके साथ ही स्पलायर अवैध कारतूस भी मुहैया कराते थे। एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम इन सप्लायरों को खोजने में जुटी है।हर दो महीने में बदले जाते थे तमंचे,असलहों के मामले में विकास का गिरोह हमेशा अपडेट रहता था। कोई नया इसमें शामिल होता तो सबसे पहले उसे तमंचा ही थमाया जाता था। यही नहीं, तमंचे कहीं धोखा न दें, इसलिए हर दो माह में वह इन्हें बदलवा देता था। पुराने तमंचों को गलाकर नए तैयार किए जाते थे।

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संवाद365 /कोमल राजपूत

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